मेरी कलम से कुछ शब्द

प्रश्न हैं मेरे मन में,

अंत कभी होते नहीं ।

सोचते हैं जवाब में,

बंद कभी होते नहीं ॥

दिमाग की बत्ती जलते ही,

बुझने का कोई नाम नहीं ।

मानव के ही शब्दकोश में,

“असंभव” शब्द का स्थान नहीं ॥

जीवन-मरण के सत्य को,

मानना ही बुद्धिमत्ता है ।

जीवनरूपी युद्ध-क्षेत्र में,

प्रेम बिना, जो निहत्था है ॥

विज्ञान कितना ही विकास कर ले,

मरण को रोक सकते नहीं ।

होना है जो, वह होकर रहेगा,

कभी उसे बदल सकते नहीं ॥

द्वारा

आर.बाबूराज जैन   टी.जी.टी. (हिंदी) ज.न.वि.पुदुच्चेरी

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