पुदुच्चेरी का आयी मंडपम्

आयी मंडपम्

     जल के लिए एक स्मृति चिह्न अगर कहीं स्थापित है तो वह पुदुच्चेरी में है। पुदुच्चेरी में जीवनयापन करने वाले लोगों को शुद्ध एवं स्वच्छ जल उपलब्ध कराने की योजना को याद दिलाने के लिए यह आयी मंडपम्‍ की स्थापना की गई। जब फ्रांस नामक देश के शासक नेपोलियन-III  शासन कर रहे थे तब इसकी स्थापना की गई।

इस मंडपम्‍ की स्थापना के पीछे  एक रोचक इतिहास है।

विजयनगर साम्राज्य के शासक राजा कृष्णदेवका साम्राज्य कर्नाटक से कन्याकुमारी तक फैला हुआ था| एक दिनराजा अपनी राजधानी हम्पी से बाहर राज्य-भ्रमण के उद्देश्य से निकले थे।जब वे पुदुच्चेरी से निकल रहे थे तब उन्होंने एक सुंदर महल को देखा। उस महल की अद्‍भुत वास्तुकला को देखकर विस्मित होकर उसने एक धार्मिक राजा होने के नाते उसे मंदिर समझकर धरती पर घुटनों के बल पर बैठकर दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम किया। चारों ओर के लोग आश्चर्य के साथ राजा को देखने लगे। एक क्षण के लिए चारों ओर सन्नाटा छा गया।

एक बूढ़ा आदमी राजा के समीप जाकर उनसे पूछा, “ महाराज! आपने एक वैश्यालय के सामने झुककर क्यों प्रणाम किया?”

राजा ने आश्चर्यपूर्वक उस वृद्ध व्यक्ति की ओर देखा और उस वृद्ध व्यक्ति से स्पष्टीकरण की माँग की ।

“महाराज! यह महल एक वैश्यालय है। आयी नामक वैश्या द्वारा संचालित है।”

शर्म के मारे राजा का मुख लाल लाल हो गया। गुस्से में उन्होंने कहा, “उस वैश्या को मेरे सामने पकड़कर लाओ और इस महल को इसी वक्त धराशायी करो ।

राजा का आदेश पाकर सैनिकों ने आदेश का पालन करना शुरु कर दिया और सैनिकों ने आयी नामक वैश्या को जंजीरों में बाँधकर राजा के सम्मुख उपस्थित किया। राजा के पैरों पर गिरकर वह माँफी माँगने लगी परंतु राजा ने उसकी बात नहीं मानी। अन्य मार्ग न सूझने पर आयी ने राजा से निवेदन किया कि “महाराज! मेरे द्वारा निर्मित महल से आपको जो अपमान हुआ है उसके लिए माँफी मांगती हूँ और उसे ध्वस्त करने हेतु कृपया अनुमति दीजिए कि मैं ही अपने महल को ध्वस्त करूँ।”

राजा की अनुमति लेकर उसने अपने महल को ध्वस्त कर दिया और उस स्थान पर लोगों के उपयोगार्थ एक तालाब की खुदाई की। तब से उस वैश्या की स्मृति में उस तालाब को आयी तालाब के नाम से जाना जाता है।

अनेक वर्षों के बाद भारत के कुछ अंशों में फ्रेंच का आधिपत्य था। पुदुच्चेरी राजधानी थी। समुद्र तट से फ्रांसीसी शहर में अकाल पड़ गया। पीने के पानी के अभाव में खिल्लत होने लगी। जहाँ कहीं भी कुआँ खोदते थे तो खारा पानी ही मिलता था।

तत्कालीन फ्रेंच देश के राजा नेपोलियन-III ने पुदुच्चेरी के पानी संकट को दूर करने हेतु वास्तुकला में निपुण मांसियर लेमरेसी को वहाँ भेज दिया। उसने 5 कि.मी.दूर स्थित आयी तालाब से पुदुच्चेरी नगर के एक बाग तक सुरंग बनाकर पानी के संकट को दूर किया।

फ्रेंच देश के राजा नेपोलियन-III    ने आयी मंडप के ऐतिहासिक सत्य को जानकर प्रभावित होकर आयी की स्मृति में एक स्मारक बनाने का आदेश दिया। वह स्मारक फ्रांसीसी स्थापत्य शैली में बनाया गया था।

जनता के पानी के संकट को दूर करने में सहायता करने पर फ्रेंच देश के राजा नेपोलियन-III  ने पुदुच्चेरी गवर्नर के माध्यम से आयी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

यह स्मारक आज भी पुदुच्चेरी के गवर्नर महल के सामने वाले बाग के मध्य में शोभित होकर दर्शकों को प्रभावित कर रहा है और पुदुच्चेरी प्रदेश सरकार के लक्ष्यों से अवगत करा रहा है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s