सुविचार-संकलन

  1. किसी के दुर्वचन कहने पर क्रोध न करना क्षमा कहलाता है ।
  2. जिस में दया नहीं ,उस में कोई सदगुण नहीं ।
  3. प्रत्येक अच्छा कार्य पहले असंभव नजर आता है ।
  4. जीवन एक पुष्प है और प्रेम उसका मधु है ।
  5. हम समस्याओं को उसी मानसिकता का उपयोग करके नहीं हल कर सकते जिस मानसिकता के द्वारा हमने उन समस्याओं को उत्पन्न किया है।
  6. आंखों से गिरा हुआ आंसू और नज़रों से गिरा हुआ इंसान कभी ऊपर नहीं उठ सकता ।
  7. अध्यापक एक ऐसी मोमबत्ती है जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाशित करता है ।
  8. कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आंखे मूंदकर उसके पीछे न चलिए। यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आंख, नाक, कान, मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों देता ?
    – विवेकानंद
  9. बड़प्पन अमीरी में नहीं, ईमानदारी और सज्जनता में सन्निहित है।— श्रीराम शर्मा आचार्य
  10. जो बच्चों को सिखाते हैं, उन पर बड़े खुद अमल करें तो यह संसार स्वर्ग बन जाय।
    — श्रीराम शर्मा आचार्य
  11. “विनय अपयश का नाश करता हैं, पराक्रम अनर्थ को दूर करता है, क्षमा सदा ही क्रोध का नाश करती है और सदाचार कुलक्षण का अंत करता है।”
    — श्रीराम शर्मा आचार्य
  12. अगर किसी को अपना मित्र बनाना चाहते हो, तो उसके दोषों, गुणों और विचारों को अच्छी तरह परख लेना चाहिए।
  13. “जब आगे बढ़ना कठिन होता है, तब कठिन परिश्रमी ही आगे बढ़ता है।”
  14. मुट्ठीभर संकल्पवान लोग, जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं।
    – महात्मा गांधी
  15. कर्म भूमि पर फ़ल के लिए श्रम सबको करना पड़ता है,
    रब सिर्फ़ लकीरें देता है रंग हमको भरना पड़ता है.
  16. पृथ्वी पर तीन रत्न हैं – जल, अन्न और सुभाषित । लेकिन मूर्ख लोग पत्थर के टुकडों को ही रत्न कहते रहते हैं । — संस्कृत सुभाषित
  17. विश्व के सर्वोत्कॄष्ट कथनों और विचारों का ज्ञान ही संस्कृति है । — मैथ्यू अर्नाल्ड
    18.  संसार रूपी कटु-वृक्ष के केवल दो फल ही अमृत के समान हैं ; पहला, सुभाषितों का रसास्वाद और दूसरा, अच्छे लोगों की संगति ।
    — चाणक्य
    19. सही मायने में बुद्धिपूर्ण विचार हजारों दिमागों में आते रहे हैं । लेकिन उनको अपना बनाने के लिये हमको ही उन पर गहराई से तब तक विचार करना चाहिये जब तक कि वे हमारी अनुभूति में जड न जमा लें । — गोथे
    20. मैं उक्तियों से घृणा करता हूँ । वह कहो जो तुम जानते हो । — इमर्सन
    21. किसी कम पढे व्यक्ति द्वारा सुभाषित पढना उत्तम होगा। — सर विंस्टन चर्चिल
    22. बुद्धिमानो की बुद्धिमता और बरसों का अनुभव सुभाषितों में संग्रह किया जा सकता है।— आईजक दिसराली
    23.  मैं अक्सर खुद को उदृत करता हुँ। इससे मेरे भाषण मसालेदार हो जाते हैं।
    24. सुभाषितों की पुस्तक कभी पूरी नही हो सकती। — राबर्ट हेमिल्टन
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